नवपाषाण युग का सम्पूर्ण इतिहास

नियोलिथिक युग, काल, या अवधि, या नव पाषाण युग मानव प्रौद्योगिकी के विकास की एक अवधि थी जिसकी शुरुआत मध्य पूर्व में 9500 ई.पू. के आसपास हुई थी, जिसे पारंपरिक रूप से पाषाण युग का अंतिम हिस्सा माना जाता है। नियोलिथिक युग का आगमन सीमावर्ती होलोसीन एपिपेलियोलिथिक अवधि के बाद कृषि की शुरुआत के साथ हुआ और इसने “नियोलिथिक क्रांति” को जन्म दिया; इसका अंत भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर धातु के औजारों के ताम्र युग (चालकोलिथिक) या कांस्य युग में सर्वव्यापी होने या सीधे लौह युग में विकसित होने के साथ हुआ। नियोलिथिक कोई विशिष्ट कालानुक्रमिक अवधि नहीं है बल्कि यह व्यावहारिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का एक समूह है जिसमें जंगली और घरेलू फसलों का उपयोग और पालतू जानवरों का इस्तेमाल शामिल है।
नई खोजों से पता चला है कि नियोलिथिक संस्कृति का आरम्भ एलेप्पो से 25 किमी उत्तर की तरफ उत्तरी सीरिया में टेल कैरामेल में 10,700 से 9,400 ई.पू. के आसपास हुआ था। पुरातात्विक समुदाय के भीतर उन निष्कर्षों को अपनाए जाने तक नियोलिथिक संस्कृति का आरम्भ लेवंत (जेरिको, वर्तमानकालीन वेस्ट बैंक) में लगभग 9,500 ई.पू. के आसपास माना जाता है। क्षेत्र में इसका विकास सीधे एपिपेलियोलिथिक नैचुफियन संस्कृति से हुआ था जिसके लोगों ने जंगली अनाजों के इस्तेमाल का मार्ग प्रशस्त किया जो बाद में सही मायने में कृषि के रूप में विकसित हुआ। इस प्रकार नैचुफियन को “प्रोटो-नियोलिथिक” (12,500–9500 ई.पू. या 12,000–9500 ई.पू.) कहा जा सकता है। चूंकि नैचुफियन अपने आहार में जंगली अनाजों पर निर्भर हो गए थे और उनके बीच एक तरह की सुस्त जीवन शैली का आरम्भ हो गया था इसलिए यंगर ड्रायस से जुड़े जलवायु परिवर्तनों ने संभवतः लोगों को खेती का विकास करने पर मजबूर कर दिया होगा। 9500-9000 ई.पू. तक लेवंत में कृषक समुदाय का जन्म हुआ और वे एशिया माइनर, उत्तर अफ्रीका और उत्तर मेसोपोटामिया में फ़ैल गए। आरंभिक नियोलिथिक खेती केवल कुछ पौधों तक ही सीमित थी जिनमें जंगली और घरेलू दोनों तरह के पौधे शामिल थे जिनमें एंकोर्न गेहूं, बाजरा और स्पेल्ट (जर्मन गेहूं) और कुत्ता, भेड़ और बकरीपालन शामिल था। लगभग 8000 ई.पू. तक इसमें पालतू मवेशी और सूअर शामिल हुए और स्थायी रूप से या मौसम के अनुसार बस्तियां बसाई गई और बर्तन का इस्तेमाल शुरू हुआ।

नियोलिथिक की सभी सांस्कृतिक तत्व संबंधी विशेषताएं हर जगह एक ही क्रम में दिखाई नहीं दी: निकट पूर्व में आरंभिक कृषक समाज में बर्तनों का इस्तेमाल नहीं होता था और ब्रिटेन में यह बात अस्पष्ट रही है कि आरंभिक नियोलिथिक काल में किस हद तक पौधों का इस्तेमाल हुआ था या स्थायी रूप से बसे हुए समुदायों का भी वजूद था या नहीं। दुनिया के अन्य हिस्सों जैसे अफ्रीका, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में स्वतंत्र सभ्यीकरण कार्यक्रमों के फलस्वरूप उनकी अपनी क्षेत्र विशिष्ट नियोलिथिक संस्कृतियों का जन्म हुआ जो यूरोप और दक्षिण पश्चिम एशिया की संस्कृतियों से बिल्कुल अलग था। आरंभिक जापानी समाजों में खेती के विकास से पहले मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता था।
पेलियोलिथिक के विपरीत जहां एक से अधिक मानव समाजों का वजूद था, केवल एक मानव प्रजाति (होमो सैपियंस) नियोलिथिक तक पहुंचने में कामयाब हुई थी। हो सकता है कि होमो फ्लोरेसिएंसिस लगभग 12,000 साल पहले नियोलिथिक के बिल्कुल प्रारंभ में बचे रह गए हों.

मिट्टी के बर्तनों के विकास के चरण के आधार पर काल-विभाजन

दक्षिण पूर्व एशिया (अर्थात् मध्य पूर्व) में नियोलिथिक के रूप में पहचानी जाने वाली संस्कृतियों का आगमन दसवीं सहस्राब्दी ई.पू. में हुआ था। आरंभिक विकास लेवंत (जैसे प्री-पोटरी नियोलिथिक ए और प्री-पोटरी नियोलिथिक बी) में दिखाई दिया और वहां से यह पूर्व और पश्चिम की तरफ फैलता चला गया। नियोलिथिक संस्कृतियों को 8000 ई.पू. के आसपास दक्षिण पूर्वी एनाटोलिया और उत्तरी मेसोपोटामिया में भी देखा गया है।
चीन के हेबेई प्रोविंस में यिक्सियन के पास प्रागैतिहासिक बेईफुदी साइट में लगभग 5000-6000 ई.पू. की सिशान और जिंगलोंगवा संस्कृतियों के साथ एक समकालीन संस्कृति के अवशेष शामिल हैं और ताइहांग पर्वतों के पूर्व में स्थित ये नियोलिथिक संस्कृतियां दो उत्तरी चीनी संस्कृतियों के बीच के पुरातात्विक खाई को भरती है। खुदाई क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 1200 वर्गमीटर से अधिक है और साइट के नियोलिथिक निष्कर्षों के संग्रह के दो चरण हैं।

नियोलिथिक 1 – प्री-पोटरी नियोलिथिक ए (पीपीएनए)
एलेप्पो के उत्तर में 25 किमी दूर टेल कैरामेल में प्रो॰ आर. एफ. माजुरोस्की द्वारा संचालित एक सीरियाई-पोलिश संयुक्त खुदाई टीम को मिले हाल के निष्कर्षों से नियोलिथिक 1 (पीपीएनए) का आरम्भ 10700 से 9400 ई.पू. के आसपास होने का पता चला है। उस साइट की पिछली खुदाई से चार वृत्ताकार टावरों का पता चला था जो ग्यारहवीं सहस्राब्दी और लगभग 9650 ई.पू. के बीच की है।
टेल कैरामेल के निष्कर्षों का पता लगने तक और पुरातात्विक समुदाय के भीतर उसे अपनाए जाने तक लेवंत (जेरिको, फिलिस्तीन और जबील (बाइबलोस), लेबनान) की 9500 से 9000 ई.पू. के आसपास की साइटों को अभी भी नियोलिथिक 1 (पीपीएनए) का आरम्भ माना जाता है। ब्रिटिश संग्रहालय और फिलाडेल्फिया की प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिकों द्वारा कार्बन डेटिंग में विभिन्न परिणामों की वजह से निश्चितता के साथ वास्तविक तिथि का निर्धारण नहीं किया गया है।
10000 ई.पू. की गोबेक्ली टेपे में दक्षिण पूर्वी तुर्की में एक आरंभिक मंदिर क्षेत्र को नियोलिथिक 1 आरम्भ माना जा सकता है। इस साइट का विकास खानाबदोश शिकारी जनजातियों द्वारा किया गया था जो इसके आसपास के क्षेत्र में स्थायी निवास की कमी का सबूत है। यह मंदिर क्षेत्र पूजा के लिए मानव द्वारा निर्मित सबसे पुराना ज्ञात स्थल हो सकता है। 25 एकड़ (100,000 मी2) को कवर करने वाले कम से कम सात प्रस्तर वृत्तों में चूना पत्थर के खम्भे हैं जिन पर जानवरों, कीड़ों और पक्षियों की नक्काशी की गई है। संभवतः छतों को सहारा देने वाले इन खम्भों का निर्माण करने के लिए शायद सैकड़ों लोगों द्वारा पत्थर के औजारों का इस्तेमाल किया गया था।
नियोलिथिक 1 की प्रमुख उन्नति वास्तविक खेती थी। प्रोटो-नियोलिथिक नैचुफियन संस्कृतियों में जंगली अनाजों को काट लिया जाता था और शायद पहले से बीज का चुनाव और फिर से बीज बोने का काम किया जाता था। अनाज को पीसकर आटा बनाया जाता था। एमर गेहूं की खेती की जाती थी और जानवरों को झुण्ड में रखा जाता था और पाला (पशुपालन एवं चयनात्मक प्रजनन) जाता था।
इक्कीसवीं सदी में 9400 ई.पू. में जेरिको के एक मकान में अंजीर के अवशेषों का पता चला. ये उत्परिवर्ती किस्म के अंजीर हैं जिनका कीड़ों द्वारा परागण नहीं किया जा सकता है और इसलिए केवल कटाई द्वारा ही पेड़ों को फिर से उगाया जा सकता है। इस सबूत से यह पता चलता है कि अंजीर पहली कृषि फसल थी जो खेती की तकनीक के आविष्कार को चिह्नित करता है। यह अनाजों की पहली खेती से सदियों पहले की बात है।
काफी हद तक नैचुफियन के मकानों की तरह एकल कमरों वाले गोलाकार मकानों के साथ बस्तियां और स्थायी हो गईं। हालांकि इन मकानों को पहली बार मिट्टी की ईंटों से बनाया गया था। पति के पास केवल एक मकान होता था जबकि उसकी हरेक पत्नी आसपास के मकानों में अपने बच्चों के साथ रहती थीं।[कृपया उद्धरण जोड़ें] बस्ती के चारों तरफ पत्थर की एक दीवार और शायद पत्थर का एक टावर (जैसा कि जेरिको में था) होता था। यह दीवार बाढ़ से बचाने या जानवरों को बाड़े में बंद करके रखने की तरह आसपास के समूहों से बचाने का काम करती थी। वहां कुछ बाड़ों का भी इंतजाम है जिनसे अनाज और मांस भण्डारण का पता चलता है।
नियोलिथिक 2 – प्री-पोटरी नियोलिथिक बी (पीपीएनबी)
नियोलिथिक 2 (पीपीएनबी) का आरम्भ लेवंत (जेरिको, फिलिस्तीन) में 8500 ई.पू. के आसपास हुआ था। पीपीएनए तिथियों की तरह उपरोक्त उल्लिखित उन्हीं प्रयोगशालाओं के दो संस्करण थे। लेकिन यह पारिभाषिक संरचना दक्षिण पूर्व एनाटोलिया और मध्य एनाटोलिया बेसिन की बस्तियों के लिए सुविधाजनक नहीं है। यह युग मेसोलिथिक युग से पहले था!
बस्तियों के मकान आयताकार और मिट्टी की ईंटों से बने होते थे जहां पूरा परिवार एक या एकाधिक कमरों में एक साथ रहता था। कब्र की खुदाई से एक पूर्वज पंथ का पता चलता है जहां लोग मृतक की खोपड़ियों को संरक्षित करते थे जिन्हें चेहरे के अनुरूप बनाने के लिए मिट्टी से लेप दिया जाता था। केवल हड्डियों के बचने लाश के बाकी हिस्से को बस्ती के बाहर सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता था और उसके बाद उन हड्डियों को बस्ती के भीतर फर्श के नीचे या मकानों के बीच में दफन कर दिया जाता था।

नियोलिथिक 3 – पोटरी नियोलिथिक (पीएन)
नियोलिथिक 3 (पीएन) का आरम्भ फर्टाइल क्रेसेंट में 6500 ई.पू. के आसपास हुआ था। तब तक मिट्टी के बर्तनों के साथ हलफियन (तुर्की, सीरिया, उत्तरी मेसोपोटामिया) और उबैद (दक्षिणी मेसोपोटामिया) जैसी विशिष्ट संस्कृतियों का उद्भव हुआ।
चालकोलिथिक अवधि का आरम्भ लगभग 4500 ई.पू. में हुआ था, उसके बाद लगभग 3500 ई.पू. में कांस्य युग का आरम्भ हुआ जिसने नियोलिथिक संस्कृतियों की जगह ली।

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