कलिंग युद्ध के कारण

अशोक के तेरहवें अभिलेख के अनुसार उसने अपने राज्याभिषेक के आठ वर्ष बाद कलिंग युद्ध लड़ा। कलिंग विजय उसकी आखिरी विजय थी। यह युद्ध 262-261 ईपू मे लड़ा गया।

कलिंग युद्ध के दो साल पहले ही सम्राट अशोक भगवान बुद्ध की मानवतावादी शिक्षाओं से प्रभावित होकर बौद्ध अनुयायी हो गये और उन्ही की स्मृति में उन्होने कई स्तम्भ खड़े कर दिये जो आज भी नेपाल में उनके जन्मस्थल – लुम्बिनी – में मायादेवी मन्दिर के पास, सारनाथ,बौद्ध मन्दिर बोधगया, कुशीनगर एवं आदी श्रीलंका, थाईलैंड, चीन इन देशों में आज भी अशोक स्तम्भ के रूप में देखे जा सकते है। सम्राट अशोक ने का प्रचार भारत के अलावा श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, पश्चिम एशिया, मिस्र तथा यूनान में भी करवाया। सम्राट अशोक अपने पूरे जीवन में एक भी युद्ध नहीं हारे। सम्राट अशोक के ही समय में 23 विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई जिसमें तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, कंधार आदि विश्वविद्यालय प्रमुख थे। इन्हीं विश्वविद्यालयों में विदेश से कई छात्र शिक्षा पाने भारत आया करते थे। ये विश्वविद्यालय उस समय के उत्कृट विश्वविद्यालय थे। शिलालेख शुरू करने वाला पहला शासक सम्राट अशोक थे। अशोक ने सर्वप्रथम बौद्ध धर्म का सिद्धान्त लागू किया जो आज भी कार्यरत है। इसलिए सम्राट अशोक महान के जीवन गाथा को अपने जीवन मे उतारने का पूरा प्रयास करना है।

युद्ध के कारण

1-कलिंग पर विजय प्राप्त अशोक अपने साम्राज्य मे विस्तार करना चाहता था।
2-सामरिक दृष्टि से देखा जाए तो भी कलिंग बहुत महत्वपूर्ण था। स्थल और समुद्र दोनो मार्गो से दक्षिण भारत को जाने वाले मार्गो पर कलिंग का नियन्त्रण था।
3-यहाँ से दक्षिण-पूर्वी देशो से आसानी से सम्बन्ध बनाए जा सकते थे।

परिणाम

1-मौर्य साम्राज्य का विस्तार हुआ। इसकी राजधानी तोशाली बनाई गई।
2-इसने अशोक की साम्राज्य विस्तार की नीति का अन्त कर दिया।
3-इसने अशोक के जीवन पर बहुत प्रभाव डाला। उसने अहिंसा, सत्य, प्रेम, दान, परोपकार का रास्ता अपना लिया।
4-अशोक बौद्ध धर्म का अनुयायी बन गया। उसने बौद्ध धर्म का प्रचार भी किया।
5-उसने अपने संसाधन प्रजा की भलाई मे लगा दिए।
6-उसने ‘धम्म’ की स्थापना की।
7-उसने दूसरे देशो से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाए
8-कलिंग युद्ध मौर्य साम्राज्य के पतन का कारण बना। अहिंसा की नीति के कारण उसके सैनिक युद्ध कला मे पिछड़ने लगे। परिणामस्वरूप धीरे-धीरे उसका पतन आरम्भ हो गया। तथा अशोक की मृत्यु के 50 वर्ष के भीतर ही मौर्य वंश का पतन हो गयाइस इस युद्ध में लगभग 100000 लोग मारे गए और लोगों को बंदी बनाकर मगध लाया गया और संपूर्ण कलिंग क्षैत्र में आग लगा दी गई इस युद्ध के बाद अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ और उसने हिंसा त्याग दी इस युद्ध का वर्णन अशोक के 13 शिलालेख से मिलता है

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