चुकंदर की खेती

चुकंदर (बीटा वल्गैरिस) अमारैन्थ परिवार का एक पादप सदस्य है। इसे कई रूपों में, जिनमें अधिकतर लाल रंग की जड़ से प्राप्त सब्जी रूप में प्रयोगनीय उत्पाद के लिये उगाया जाता है। इसके अलावा अन्य उत्पादों में इसके पत्तों को शाक रूप में प्रयोग करते हैं, व इसे शर्करा-स्रोत रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
किस्में : क्रिमसन ग्लोब, डेट्रोइअ डार्क रेड

उर्वरक व खाद

गोबर का खाद : 10-15 टन/है.
नत्रजन : 70 कि.ग्रा./है.
फॉस्फोरस : 100 कि.ग्रा./है.
पोटाश : 60 कि.ग्रा./है.
खेत तैयार करते समय गोबर की खाद, आधी नत्रजन, फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा भूमि में मिला दें। शेष नत्रजन मुवाई के पश्चात् जब पौधे 10-15 सें.मी. के हो जाएँ तो छंटाई के साथ मिट॒टी चढ़ाते समय डालें।
बीज की मात्रा : 10 – 12 कि.ग्रा./है.
बुवाई का समय : अक्तूबर से नवम्बर
बुवाई : बुवाई 45 सें.मी. दूर बनी मेढों पर 1.5 से 2 सें.मी. गहराई पर करें और पौधों पर 15-20 सें.बी. अन्तर बनाएँ। बोने से पहले बीज को प्रायः 12 घंटे पानी में भिंगोयें। प्रत्येक बीज से कई बीजांकुरण हो सकते हैं जिसके कारण छंटाई करनी चाहिए।
सस्य क्रियाएँ : खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई से 2-3 दिन पहले जब खेत में पर्याप्त नमी हो तो स्टाम्प 3 लिटर/है. की दर से छिड़काव करें।
कटाई व उपज : प्रायः जड़ जब 3-5 सें.मी. व्यास की हो जाय तो जड़ों को उखाड़ लिया जाता है। इसकी औसत उपज 20-25 टन प्रति हेक्टेयर होती है।
बीजोत्पादन : इसका बीज उत्पादन शीतोष्ण जलवायु में समुद्र तल से 1200 मीटर की ऊँचाई से ऊपर पर्वतीय क्षत्रों में संभव है।

कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी

मूली, गाजर, शलगम एवं चुकंदर को मुलायम अवस्था में खेत से निकालें।
खुदाई के बाद पत्तियों को हटाकर धुलाई कर, श्रेणीकरण करें।
श्रेणीकृत सब्जियों को प्लास्टिक की थैलियों या क्रेट में भर कर बाजार भेजें।
अगर भण्डारण की आवश्यकता हो तो 3-4 डिग्री से. तापमान एवं 85-90 प्रतिशत आर्द्रता पर शीतगृह में रखें।
सुखाकर सूखे उत्पाद बनाएँ।

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